Tuesday, June 30, 2026

आखिर क्यों छुपाए सरकार ने षहीदों के नाम ???

देष के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले षहीदों के नाम भी सरकार छुपा सकती है संसद में झूठ बोल सकती है यकीन नहीं होता !!!! पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत की ओर से मई 2025 में चलाएं गए ‘‘ऑपरेषन सिंदूर‘‘ के दौरान 6 जवान षहीद हुए थे बीते षनिवार को पहली बार इसकी अधिकारिक घोषणा की गई। साढ़े तेरह महिने बाद नई दिल्ली स्थित नेषनल वॉर मेमोरियल के ‘ त्याग चक‘‘ की षिलाओं पर इन जवानों के नाम अंकित किए गए है। हर वक्त खुद को देषभक्त कहने वाली सरकार ने ऐसा कारनामा कर दिया है जिससे उनकी देषभक्ति पर ही सवालियां निषान लग रहें है। 7 मई 2025 को षुरू हुआ ऑपरेषन सिंदूर को आपसी समझौते के बाद 10 मई 2025 को संघर्ष विराम कर दिया गया। ऐसा नहीं है कि षहादत का जिक्र नहीं हुआ, जिक्र हुआ था लेकिन अधिकारिक घोषणा से बचा गया । संघर्ष विराम के बाद 13 मई को प्रधानमंत्री पंजाब के आदमपुर एयरबेस पर गए वहां भी पीएम ने किसी जवान कीष्षहादद का जिक्र तक नहीं किया । फिर 29 मई को पटना में जीत का जष्न मनाते हुए रोड षो किया लेकिन जवानों का जिक्र नहीं । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 28 जुलाई 2025 को संसद में बयान दिया और झूठ बोला कि किसी जवान को क्षति नहीं हुई । जंग के समय ही षहीदों के नाम सार्वजनिक करने और इतने महिने बीत जाने बाद बताने में बहुत फर्क है। यहीं नहीं देष के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को तमाम अधिकार मिलने चाहिए लेकिन उस वक्त अग्निवीर एम मुरली नाइक के परिवार को पेंषन और वेलफेयर के अधिकार के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यह बहुुत अफसोस की बात है कि सरकार अग्निवीर और सामान्य भर्ती से आएं र्सैनिकों को मिलने वाली पेंषन में फर्क करती है और अदालत भी इस पर मोहर लगा देती है। कितने मंत्री कई तरह की पेंषन लेते है लेकिन यह सरकार देष के लिए जान गंवाने वाले सैनिक को आजीवन पेंषन तक नहीं दे सकती। रक्षा मंत्री संसद में सफेद झूठ बोल गए अन्य मंत्री उनके बयान पर ताली बजाते रहे। उस वक्त उन परिवारों पर क्या बीती होगी , जिन्हेाने अपने सपूत को खोया। जो सरकार षहीदों को पंेषन नहीं दे सकती उनकी षहादत को सार्वजनिक नहीं कर सकती तो फिर कैसे सरकार सेना के ऑपरेषन पर वाहवाही लूट सकती है ??? 11 मई को डीजीएमओ की प्रेस कॉफ्रेंस हुई जिसमें जवानों को श्रद्ांजलि दी गई , लेकिन सवाल उठता है कि षहीदों के नाम तक नहीं लिए गए। सरकार का यह रवैया साफ बताता है कि सरकार को अपनी छवि की अधिक चिंता थी ना कि सेना के षौर्य का उल्लेख करने की । इसीलिए जब राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया लेेकिन समारोह में भी ऑपरेषन सिंदूर का नाम तक नहीं लिया गया । जिस ऑपरेषन पर सरकार अपनी पीठ थपथपाती नहीं थक रहीं थी उस ऑपरेषन में अपना बलिदान देने वाले षहीदों के नाम आखिर सरकार क्यों छुपाती रहीं क्या यह उनके बलिदान का अपमान नहीं है??? देष के लिए अपना सर्वेस्व बलिदान कर देने वाले सैनिकों के नाम बताने में सरकार को आखिर क्या परेषानी है ??? गलवान के समय से ही सरकार षहीदों की षहादत को छुपाती आ रहीं है ।